​रांची। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए राज्य में जल्द से जल्द एक सशक्त 'भाषा अकादमी' के गठन की मांग की है। सोमवार को रांची में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का मूल आधार हैं, जिन्हें बचाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

​बंधु तिर्की ने बताया कि 'झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा' के बैनर तले आगामी 9 अक्टूबर को एक 'भाषा यात्रा' निकाली जाएगी। यह यात्रा मोराबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू होकर कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल तक जाएगी।

​पूर्व मंत्री ने सरकार के समक्ष कई मांगे रखी हैं। इनमें झारखंड की सभी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक स्पष्ट और व्यापक राज्य भाषा नीति बनाने,प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक झारखंडी भाषाओं के पठन-पाठन के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों के पद सृजित कर बहाली करने,

​ माध्यमिक आचार्य के पद पर चयनित 877 अभ्यर्थियों को अविलंब नियुक्ति पत्र सौंपने,भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य बजट में अलग से वित्तीय व्यवस्था,लोक साहित्य, लोकगीत, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं के संरक्षण के लिए ठोस दस्तावेजीकरण की व्यवस्था,भाषा नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय साहित्यकारों, भाषाविदों और विशेषज्ञों को शामिल करने और शिक्षण संस्थानों में झारखंडी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का नियमित आयोजन शामिल है।