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GDP पर बोले मुख्य आर्थिक सलाहकार- अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज्यादा तेज रिकवरी, चालू वित्त वर्ष में बेहतर प्रदर्शन का अनुमान

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मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि अर्थव्यवस्था की हालत में उम्मीद के कहीं ज्यादा तेजी से रिकवरी हो रही है.

मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को कहा कि अर्थव्यवस्था की हालत में उम्मीद के कहीं ज्यादा तेजी से रिकवरी हो रही है. और उससे चालू वित्त वर्ष में अथर्व्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. निकट भविष्य के लिए दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें सावधान रहते हुए उम्मीद करनी चाहिए और कोरोना महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़े असर को देखते हुए सावधानी जरूरी है.

सुब्रमण्यम ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए यह बताना मुश्किल है कि अर्थव्यवस्था सकारात्मक दायरे में तीसरी तिमाही में आएगी या फिर चौथी तिमाही में. मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) ने कहा कि पहली और दूसरी तिमाही में जो चीजें देखने को मिली हैं और जो अच्छा सुधार देखने को मिल रहा है, उनके हिसाब से अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की संभावना है.

सुब्रमण्यम ने कहा कि तीसरी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति नरम हुई है और इस पर सरकार की तरफ से कड़ी नजर रखी जा रही है.

इंडिया इंक ने बताया अर्थव्यवस्था में रिकवरी

GDP के आंकड़ों पर इंडस्ट्री और विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में और रिकवरी का विश्वास जाहिर किया और कहा कि सरकार के कदमों का फल देखने को मिल रहा है. वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ट्वीट में कहा कि दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी हो रही है. सरकार के प्रोत्साहन और सुधार पर कोशिशों के नतीजे दिख रहे हैं. हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2021 के दूसरे भाग में सकारात्मक ग्रोथ और 2022 में दुगनी संख्या में ग्रोथ देखने को मिलेगी.

CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बैनर्जी ने कहा कि दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े -7.5 फीसदी, पिछली तिमाही में दिखी -23.5 फीसदी की गिरावट के मुकाबले तेज सुधार है, जिससे यह विश्वास बढ़ेगा कि पिछले कुछ महीनों में लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढिलाई के साथ अर्थव्यवस्था में साफ सुधार आया है.

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सितंबर ​तिमाही में 7.5 फीसदी की गिरावट

वित्त वर्ष 2020-21 की जुलाई-सितंबर ​तिमाही में देश की GDP (Gross Domestic Product) में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. यह जानकारी शुक्रवार को जारी आंकड़ों से सामने आई है. अप्रैल-जून तिमाही में यह गिरावट 23.9 फीसदी की थी जो पिछले 40 सालों में सर्वाधिक थी. भले ही जीडीपी में गिरावट पिछली तिमाही से कम हो लेकिन लगातार दो तिमाही जीडीपी में कमी आने से देश मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में टेक्निकल रिसेशन के दौर में चला गया है.

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