Home सियासत बिहार में बंपर वोटिंग और कोरोना का कहर

बिहार में बंपर वोटिंग और कोरोना का कहर

0
389

बिहार में बंपर वोटिंग और कोरोना का कहर
समी अहमद पटना
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 71 सीटों के लिए हुए मतदान का प्रतिशत 55.69 रहा। इस खबर के साथ ही अखबरों के अंदर के पन्नों पर यह खबर भी छपी है कि बिहार में कोरोना से बीमार लागों की संख्या दो लाख 14 हजार से अधिक हो गयी।
एक तरफ बिहार में चुनावी बहस अपने परवान पर है तो दूसरी तरफ कोरोना से बड़े-बड़े नेता बीमार पड़ चुके हैं। भाजपा के बिहार प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवन्द्र फड़नवीस, भाजपा नेता केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और कई अन्य नेता भी कोविड-19 से बीमार हो चुके हैं। इसके साथ ही बिहार के दो मंत्रियों की कोरोना और कोरोना के बाद की पेचीदगियों से जीवन की जंग हार गये।
निर्वाचन आयोग के अनुसार 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए इन 71 सीटों पर औसतन 54.75 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह इस बार एक प्रतिशत से कुछ कम संख्या में मतदान अधिक हुआ। जमुई जिले के चकाई में सबसे अधिक 65.83 प्रतिशत और मंुगेर जिले के जमालपुर में सबसे कम 46.39 प्रशित मतदान हुआ।
इस बीच बिहार में गुरुवार को कोरोना के 783 मरीज पहचान में आये। इसी दिन सरकारी आंकड़े के हिसाब से सात मरीजों की मौत भी कोरोना से हुई। उधर, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री यह दावा कर रहे हैं कि बिहार में कोरोना से ठीक होने की दर 95.55 प्रशित है।
कोरोना संक्रमण के कारण विपक्षी दलों ने बिहार में फिलहाल चुनाव नहीं कराने की बात कही थी लेकिन सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग नहीं माने। इसके बाद गया में हुई पहली चुनावी सभा में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल जहां दो गज दूरी बनाये रखने की ताकीद मजाक बनकर रह गयी। काफी शिकायत और चर्चा के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई लेकिन इस पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
बिहार में अधिकतर कोरोना जांच रैपिड एंटीजन किट से हो रही है जिसके परिणाम को अक्सर संदिग्ध माना जाता है। इसी कारण जब प्रधानमंत्री की सभा होने वाली होती है तो उनके संपर्क में आ सकने के संभावित लागों की कोरोना जांच इस किट से नहीं की जाती बल्कि इसके लिए आरटी-पीसीआर जांच करायी जाती है।

तेजस्वी के 10 लाख के बाद नीतीश का 10 लाख
समी अहमद पटना
बिहार विधानसभा चुनाव में ‘जंगल राज‘ की रट अब धीमी पड़ गयी है। महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की 10 लाख नौकरी पर पहले दस्तखत की बात को नकारने की कोशिश भी नाकाम दिख रही है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले 19 लाख रोजगार की घोषणा की। अब जदयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्यमियों के लिए दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता को अपने चुनावी भाषण में प्रमुखता दी है। उन्होंने यह सहायता 18 साल से उपर के हर व्यक्ति को देने की बात कही है।
अब तक अनुसूचित जाति व अनूसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत पांच लाख रुपए अनुदान के तौर पर और शेष पांच लाख की राशि ब्याजमुक्त दी जा रही थी।
राजद के तेजस्वी यादव की दस लाख नौकरियों की घोषणा का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनावी भाषण में यह कहकर मजाक उड़ाया था कि इतनी नौकरी के लिए पैसे कहां से लाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि इसके लिए पैसे जेल से आएंगे या नकली नोट देंगे। इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने पूरा हिसाब-किताब बताया कि कैसे दस लाख नौकरियां देना बजट के बाहर है।
दूसरी तरफ तेजस्वी का तर्क था कि बजट के काफी पैसे वापस हो जाते हैं और अभी की वैकेंसी भी इतनी है कि इतनी नौकरी देना मुश्किल नहीं होगा।
अब तेजस्वी यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रोजगार के बार में बात क्यों नहीं करते। एक इंटरव्यू में तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद ने सााजिक न्याय का काम किया, अब वे आार्थिक न्याय की बात कर रहे हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here