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किसान हित के नाम पर काले कानून थोपती मोदी सरकार

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किसान हित के नाम पर काले कानून थोपती मोदी सरकार
सरकार नए कानून इसलिए बनाती है,ताकि उससे देश के लोगों का भला हो,मगर सरकार की इस तरह के कानून बनाने लगे जिससे लोग गुलामी की आहट महसूस करने लगें तो उनका विरोध होना लाजिमी है,मोदी सरकार ने किसानों के हित में जो नए तीन कानून बनाए हैं,उससे किसानों को लगता है कि इनकी वजह से कार्पोरेट के गुलाम बन जाएंगे,सरकार ने तीन नए कानून बनाए हैं, जिसमें से पहला है कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य कानून

अभी तक क्या होता है कि किसान अपनी जेब से पैसा खर्च करके खेती करता है,जमीन जोतता है,फसल बोता है,उसकी सिंचाई करता है,उसकी रखवाली करता है,बाद मैं फसल तैयार होने पर उसको काटकर, फसल से बीज अलग करके,उनको ढोकर उसे बेचने वह मंडी ले जाता है,यह सब किसान अपने पैसो से और अपनी मेहनत से करता है

अब यहीं पर पेंच है,अभी तक सरकार मंडियों के जरिए किसानों की फसल खरीदती है,किसान मंडी तक अपनी फसल लाते है,और वहां किसान अपनी फसल सरकार को बेचते हैं,सरकार फसल खरीदने के लिए एक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है,जिसे एमएसपी कहते हैं,पर मंडी मैं सरकार खुद किसानों ने फसल नहीं खरीदती है,सरकार के पास न इतने आदमी है,और न इतना बड़ा तंत्र है कि वह लाखों किसानों से मंडी में फसल खरीद सके,दूसरी बात इसमें लंबा समय लग सकता है,हर मंडी मैं हजारों किसान फसल बेचने आते हैं,अब हजारों किसानों की लाखों क्विंटल फसल तोलना,उसकी क्वालिटी चेक करना एक दिन का नहीं कई दिन का काम होता है,और किसान हफ्तों तक अपनी फसल तुलवाने और बेचने के लिए हफ्तों तक मंडी के बाहर नहीं रह सकता है,तो इस कमी को दूर करते हैं आढ़तिए, हर मंडी मैं दर्जनों आढ़ती रहते हैं,वह किसानों से एमएसपी पर फसल खरीदते है,और सरकार को देते है, मतलब सरकार किसानों से सीधे फसल न खरीदकर आढ़तियों के जरिए फसल खरीदती है , उम्मीद है यहां तक आपकी समझ में आ गया होगा कि सरकार किसानों की फसल किस तरह खरीदती है
अब किसान मंडी में फसल बेचते समय मंडी टैक्स भी देते हैं,और साथ में आढ़तियों को फसल बेचने का कमीशन भी देते हैं,अभी तक फसल बेचने की यही व्यवस्था है
मगर अब सरकार ने जो नया कानून बनाया है,उसमें कहा गया है कि कोई भी किसान से सीधे फसल खरीद सकता है,आप कहेंगे यह तो बहुत अच्छी बात है, मगर यहीं पर असली पेंच है

अब कोई भी किसान न घर घर जाकर फसल खरीदता है,और न हम या आप सीधे किसान से जाकर फसल खरीदते हैं,किसान घर घर जा नहीं सकता है,और न हम या आप खेत तक जाकर फसल खरीद सकते हैं,तो अब किसानों से फसल कौन खरीदेगा,वहीं जो उसको दो पैसे ज्यादा मैं बेचेगा,उसको भी अपना मुनाफा चाहिए होगा,अब यह काम भी वही करेगा जिसके पास पैसा होगा,कारण फसल खरीदना ही काफी नहीं है,फसल खरीदकर उसको गोदामों मैं सुरक्षित रखकर,फिर उसको दुकानों तक पहुंचाने के लिए सैकड़ों आदमियों की जरूरत होगी,इसके लिए बड़े पैमाने पर पूंजी चाहिए होगी,गोदाम बनाने के लिए ही करोड़ों की पूंजी लगेगी

तो इससे होगा क्या,बड़े कारपोरेट फसल खरीदने और बेचने के व्यापार में आ जाएंगे, आप कहेंगे कि यह तो बहुत अच्छा है,अब किसान मंडी मैं फसल बेचे या कारपोरेट को,उसके पास अब विकल्प है पर यह होगा नहीं, क्यों

क्योंकि शुरू शुरू मैं तो कारपोरेट सरकारी एमएसपी पर या हो सके तो उससे ज्यादा कीमत पर फसल खरीदेंगे,इससे यह होगा कि शुरू शुरू में तो किसान ज्यादा कीमत के कारण कारपोरेट को फसल बेचेगा वह मंडी नहीं जाएगा,फिर क्या होगा मंडी को न टैक्स मिलेगा,और न आढ़ती को कमीशन मिलेगी, मंडी चलती ही टैक्स से है,जब मंडी मैं फसल बिकेगी ही नही तो मंडियां बंद हो जाएंगी,और मंडियों के बंद होने से किसानों के पास सिर्फ फसल बेचने का एक विकल्प रह जाएगा,वह होगा कारपोरेट,

अब कारपोरेट मन माने दम पर फसल खरीदेगा,और मनमाने दम पर लोगों को बेचेगा,किसानों को फसल की पूरी कीमत नहीं मिलेगी और हम तक जो अनाज पहुंचेगा वह आज से काफी महंगा होगा, अब किसान विरोध ही इस बात पर कर रहे हैं कि सरकार एमएसपी को कानूनी बना दे,ताकि कोई भी किसान से फसल एमएसपी से कम कीमत पर न खरीद पाए,किसान कहते है अगर यह होता है तो फिर मंडी रहे या न रहे,उनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा,क्योंकि कोई भी उनसे कम कीमत पर फसल नहीं खरीद पाएगा, अभी तक मंडी मै फसल एमएसपी पर बेची जाती है,मगर जब मंडियां बंद हो जाएंगी तब एमएसपी कौन देगा,अगर कारपोरेट देता है तो सरकार लिखकर देदे कि एमएसपी से कम कीमत पर कोई भी किसान से फसल नहीं खरीद पाएगा

और सरकार यह नहीं करना चाहती है,क्योंकि वह यह कर देगी तो अंबानी अडानी का अनाज के व्यापार से मुनाफा कमाने का मौका निकल जाएगा,उनको मुनाफा तभी होगा जब वह किसानों से कम कीमत पर फसल खरीद कर उसको हम तक ज्यादा कीमत में पहुंचाएं,और सरकार तो है ही अंबानी अडानी की दलाल,इसलिए वह किसानों को एमएसपी की गारंटी नहीं दे रही है,बस गोल गोल बातें कर रही है,और इसी बात को लेकर किसान वाटर कैनन की बौछार और लाठियों की मार सह रहे हैं,क्योंकि यह नया कानून उनकी रोजी रोटी का सवाल बन गया है

उम्मीद है आप यह सब पढ़कर समझ जाओगे कि किसान आंदोलन क्यों कर रहे हैं,और सरकार उनको एमएसपी की गारंटी क्यों नहीं दे रही है

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